Chanchal Added a new poem
सर में जीवन है, इससे ही
वह लहराता रहता प्रतिपल,
सरिता में जीवन,इससे ही 
वह गाती जाती है कल-कल

निर्झर में जीवन,इससे ही 
वह झर-झर झरता रहता है,
जीवन ही देता रहता है 
नद को द्रुतगति,नद को हलचल.
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